जेएनयू का प्रोटेस्ट :Opinion politics Trending 

जेएनयू का प्रोटेस्ट देश की तस्वीर नहीं है

जेएनयू का प्रोटेस्ट : दीपिका पादुकोण जो जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में गई थी, न ही इस देश में पैदा हुई है और न ही इस देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को न ही निभा पाती है और न ही उनको असल मुद्दों की समझ है. जेएनयू का प्रोटेस्ट केवल लेफ्ट-विंग स्टूडेंट संगठनो का विरोध-प्रदर्शन जो कि देश भर का 1 परसेंट भी रिप्रेजेंट नहीं करते है.

क्या जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ही देश में टॉप की यूनिवर्सिटी है ? बिलकुल भी नहीं ! जहाँ कोई इस बात को स्वीकारे न या न स्वीकारे लेकिन जेनयू में हो रहा यह प्रोटेस्ट केवल बतौर देश भारत की तस्वीर को धूमिल करने की घटिया साज़िश है. इसमें शामिल है अर्बन नक्सल्स, लेफ्ट स्टूडेंट लीडर्स, बुद्धिजीवी वर्ग और कम्युनिस्ट पार्टियां जिनके लिए केवल देश को तोड़ना और इस वतन की सत्ता को अपने नाम कर राज करना है.

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ये अपने ही लोगों का इस्तेमाल करते है. इनके लिए केवल अपने स्वार्थ वाले मकसदों को पूरा करना ही मायने रखता है. पता नहीं सामान्य स्टूडेंट्स इनकी बातों में आ भी कैसे जाते है ? यह कम्युनिज्म ज़हर के बराबर है ऐसा कहना था भारतीय जन संघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय जी का जिनके लिए पूरा जीवन केवल राष्ट्र के प्रति सेवा करना ही एकमात्र लक्ष्य रहा.

अब इतना तो साफ़ था कि दीपिका को अपनी फिल्म की प्रमोशन करनी थी और वह वामपंथी होने का सिर्फ ढोंग भी कर रही हो सकती है लेकिन उनके साथ वामपंथी शायर गुलज़ार की बेटी मेघना गुलज़ार भी थी जो कि दीपिका की मूवी छपाक की डायरेक्टर भी है इसलिए निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि दीपिका भी मौन रहकर खुद को लेफ्ट विंग क्लब का मेंबर बना सकती है.

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पूरे देश में हज़ारो यूनिवर्सिटीज है लेकिन विरोध प्रदर्शन केवल भाजपा शासित राज्यों में ही क्यों? इलाहाबाद में भी शुएट्स – एक ईसाई यूनिवर्सिटी है और वहां पर तो किसी को भी किसी भी मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन करते नहीं देखा गया फिर आखिर किस बात पर लोगों को लगेगा कि बस जामिया-जेएनयू में विरोध प्रदर्शन ही देश की तस्वीर है. बिलकुल नहीं यह सिर्फ लेफ्ट विंग की तस्वीर जिनका काम है देश को बर्बाद करना और अपने जेहादी साथियों के साथ मिलकर यहाँ कम्युनिज्म-इस्लामिक सिस्टम को लागू करना जिससे कि बस इतना ही साफ़ होता है कि इनके ऊपर मोदी सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक करने की ही ज़रुरत है बस जिससे यह अस्तित्व में ही न रह पाए.

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